(Desi Bhindi powder ) देसी भिण्डी जड़ का देसी हाथ से तैयार भिंडी पॉउडर
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(Desi Bhindi powder ) देसी भिण्डी जड़ का देसी हाथ से तैयार भिंडी पॉउडर

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आयुर्वेद में धातु रोग का एकमात्र और अंतिम इलाज है भिंडी का पाउडर और आपका 20 साल पुराना धातु रोग भी इसके सेवन से जड़ से खतम हो जाएगा , आइये जानते है भिंडी पाउडर की सेवन विधि।


धातु रोग -एक गंभीर बीमारी है पुरुषों की ,इसमें धातु दुर्बलता हो जाती है यह रोग भारतीय पुरुषों में भारी संख्या में पाया जाता है इस रोग में कुछ व्यक्तियों को लेट्रिन करते समय धातु गिरता है और कुछ को 24 घंटे चिपचिपा पानी लगातार निकलता रहता है , किसी किसी को लड़की से फ़ोन पर बात करते समय चिपचिपा पानी निकलता है , इस बीमारी से कमर दर्द ,कमजोरी ,तनाव की कमी ,कब्ज का रहना ,कमजोर पाचन तंत्र ,जल्दी स्खलित हो जाना ,लैट्रिन करते समय धातु का गिरना आदि समस्याएं हो जाती है इस रोग की वजह से बेहद कमजोरी आती है इस रोग के लिए आयुर्वेद में एकमात्र आखरी इलाज बताया है जोकि भिंडी पाउडर के रूप में मिलता है इस अनमोल ओसधि भिंडी पाउडर को विशेष पद्धति से बनाया जाता है जो धातु रोग के साथ में अन्य बीमारियां जैसे शीघ्रपतन ,स्वप्नदोष,चिपचिपा पानी का गिरना ,कमजोरी ,जल्दी वीर्य का निकल जाना, तनाव का ना आना ,महिलाओं का सफेद पानी, कमर का दर्द ,शुक्राणु की कमी, नपुंसकता , आदि को भी पूरी तरह से ठीक करता है ,
(यदि आप एक साल से अधिक समय से रोग ग्रस्त हैं तो Aj Ayurveda ka desi हाथ से बना हुआ 1150/- रूपए वाला भिंडी पाउडर उपयोग करें। 


भिंडी पाउडर खाने की विधि :- एक गिलास हल्का गर्म दूध में 2 चम्मच मिश्री और दो चम्मच भिंडी पाउडर(5 to 10 grams)मिलाकर के सुबह खाली पेट और रात में खाना खाने के बाद लिया जाता है। इसके अलावा भिंडी पाउडर दूध , मठा , और पपीते में मिलाकर खाया जाता है , जो की हमारे धातु रोग चिकित्सक रोगी की पूरी जानकारी लेने के बाद बताते है। (संपर्क करें मोबाइल नंबर 8979923938)


परहेज क्या करें :- धातु रोग से पीड़ित व्यक्ति को संतुलित एवं सुपाच्य भोजन का सेवन करना चाहिए | तासीर में गरम पदार्थ जैसे – अधिक मिर्च मसालेदार भोजन, फ़ास्ट फ़ूड, तेल से तली हुई चीजें, सड़ा – बासी खाना, नशीले पदार्थ , नॉनवेज , राइस,प्याज़ , लहसुन,अदरक,योन शक्ति वर्द्धक दवाइयां आदि से परहेज रखना चाहिए | (किसी भी प्रकार का खट्टा खाने से पूर्ण निषेध रखें)
खाने का अवधि :- एक साल से कम समय से पीड़ित रोगी को कम से कम 40 दिन लगातार इसका सेवन करना चाहीये ,यदि रोगी एक साल से से ज्यादा समय से पीड़ित है तो हमारे धातु रोग आचार्य की सलाह अनुसार उपयोग कीजिये, प्राचीन आयुर्वेद की और से आचार्य जी से सलाह लेने की निःशुल्क सुविधा दी जाती है (संपर्क करें मोबाइल नंबर 8979923938पर)

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भिंडी को बनारस में इसे ‘राम तरोई’, छत्तीसगढ में ‘रामकलीय’, बंगला में स्वनाम ख्यात फलशाक, मराठी में ‘भेंडी’, गुजराती में ‘भींडा’, फारसी में ‘वामिया’ कहते हैं। भिण्डी एक सब्जी है। इसका वृक्ष लगभग १ मीटर लम्बा होता है।
बबहिंदी को कुछ आदिवासी सेक्स बढ़ाने के लिए कच्ची खाते हैं। इससे वीर्य गाढ़ा होता है। वातरोगों में भी भिन्डी कारगर है। 
कोलन कैंसर को दूर करने में भिंडी बहुत फायदेमंद है। यह आंतों में मौजूद विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करती है, जिससे आंतें स्वस्थ रहती हैं और बेहतर तरीके से कार्य करती हैं।
2 हृदय – भिंडी आपके दिल को भी स्वस्थ रखती है।इसमें मौजूद पैक्टिन कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है, साथ ही इसमें पाया जाने वाला घुलनशील फाइबर, रक्त में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है, जिससे हृदय रोग का खतरा कम होता है 
आश्चर्यजनक लाभ 

भिंडी जड़ पाउडर ,पुरषो की योन कमजोरी , स्वप्नदोष , तनाव ना आना , शीघ्रस्खलन , धात का गिरना , धातु रोग , कमजोर शुक्राणु , नपुंसकता , पेशाब से चिपचिपा पानी आना , महिलाओ का सफ़ेद पानी, कमर दर्द ,आदि की रामबाण दवा है

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अक्सर ऐसा देखा जाता है, कि जब लोगों को खुजली होती है, तो वे खुजली के इलाज के लिए कई तरह के नुस्खे आजमाते हैं। कई बार जब कोई उपाय काम ना करे, तो आप भिंडी के फल को पीसकर लेप बना लें। इसे खुजली वाले स्थान पर लगाएं। इससे खुजली ठीक हो जाती 
Aj Ayurveda दस्त रोकने के लिए फायदेमंद भिंडी का सेवन (Benefits of Bhindi to Stop Diarrhea in Hindi)
दस्त में भी भिंडी का प्रयोग करना फायदेमंद (bhindi ke fayde in hindi) होता है। दस्त की बीमारी में भिण्डी के फलों को मसल लें। इसमें मिश्री मिला लें। इसका सेवन करें। इससे दस्त में लाभ होता है
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अन्य भाषाओं में भिंडी के नाम (Bhindi – Lady Finger Called in Different Languages)
भिंडी का वानस्पतिक नाम ऐबलमोस्कस ऐस्कुलेन्टस (Abelmoschus esculentus (Linn.) Moench, Syn-Hibiscus esculentus Linn., है, और यह मालवेसी (Malvaceae) कुल की है। इसे दुनिया भर में इन नामों से भी जाना जाता हैः-
Bhindi in-
Hindi- भिण्डी, रामतोरई
Urdu- भिन्डी (Bhindi)
English – Lady’s finger (लेडी फिंगर), गुम्बो (Gumbo), ओकरा (Okra) 
Sanskrit- तिण्डिशा, भेण्डा, करपर्णफल, गन्धमूला 
Konkani- बेन्डो (Bendo)
Kannada- बेन्डेकायी (Bendekayi) 
Gujarati- भिंडो (Bhindo) 
Tamil- वेन्डी (Vendi) 
Telugu- वेन्डा (Venda) 
Bengali- भेण्डी (Bhendi), ढेरासा (Dherasa) 
Nepali- रामतोरिया (Ramturiya) 
Punjabi- भिंडी (Bhindi), भेंडा (Bhenda) 
Malayalam- वेन्टा (Vanta) 
Marathi- भेण्डी (Bhendi) 
Arabic- बामीया (Bamyah) 
Persian- बामीयाह (Bamiyah)
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आयुर्वेद में धातु रोग का एकमात्र और अंतिम इलाज है भिंडी का पाउडर और आपका 20 साल पुराना धातु रोग भी इसके सेवन से जड़ से खतम हो जाएगा , आइये जानते है भिंडी पाउडर की सेवन विधि।


धातु रोग -एक गंभीर बीमारी है पुरुषों की ,इसमें धातु दुर्बलता हो जाती है यह रोग भारतीय पुरुषों में भारी संख्या में पाया जाता है इस रोग में कुछ व्यक्तियों को लेट्रिन करते समय धातु गिरता है और कुछ को 24 घंटे चिपचिपा पानी लगातार निकलता रहता है , किसी किसी को लड़की से फ़ोन पर बात करते समय चिपचिपा पानी निकलता है , इस बीमारी से कमर दर्द ,कमजोरी ,तनाव की कमी ,कब्ज का रहना ,कमजोर पाचन तंत्र ,जल्दी स्खलित हो जाना ,लैट्रिन करते समय धातु का गिरना आदि समस्याएं हो जाती है इस रोग की वजह से बेहद कमजोरी आती है इस रोग के लिए आयुर्वेद में एकमात्र आखरी इलाज बताया है जोकि भिंडी पाउडर के रूप में मिलता है इस अनमोल ओसधि भिंडी पाउडर को विशेष पद्धति से बनाया जाता है जो धातु रोग के साथ में अन्य बीमारियां जैसे शीघ्रपतन ,स्वप्नदोष,चिपचिपा पानी का गिरना ,कमजोरी ,जल्दी वीर्य का निकल जाना, तनाव का ना आना ,महिलाओं का सफेद पानी, कमर का दर्द ,शुक्राणु की कमी, नपुंसकता , आदि को भी पूरी तरह से ठीक करता है ,
(यदि आप एक साल से अधिक समय से रोग ग्रस्त हैं तो Aj Ayurveda ka desi हाथ से बना हुआ 1150/- रूपए वाला भिंडी पाउडर उपयोग करें। 


भिंडी पाउडर खाने की विधि :- एक गिलास हल्का गर्म दूध में 2 चम्मच मिश्री और दो चम्मच भिंडी पाउडर(5 to 10 grams)मिलाकर के सुबह खाली पेट और रात में खाना खाने के बाद लिया जाता है। इसके अलावा भिंडी पाउडर दूध , मठा , और पपीते में मिलाकर खाया जाता है , जो की हमारे धातु रोग चिकित्सक रोगी की पूरी जानकारी लेने के बाद बताते है। (संपर्क करें मोबाइल नंबर 8979923938)


परहेज क्या करें :- धातु रोग से पीड़ित व्यक्ति को संतुलित एवं सुपाच्य भोजन का सेवन करना चाहिए | तासीर में गरम पदार्थ जैसे – अधिक मिर्च मसालेदार भोजन, फ़ास्ट फ़ूड, तेल से तली हुई चीजें, सड़ा – बासी खाना, नशीले पदार्थ , नॉनवेज , राइस,प्याज़ , लहसुन,अदरक,योन शक्ति वर्द्धक दवाइयां आदि से परहेज रखना चाहिए | (किसी भी प्रकार का खट्टा खाने से पूर्ण निषेध रखें)
खाने का अवधि :- एक साल से कम समय से पीड़ित रोगी को कम से कम 40 दिन लगातार इसका सेवन करना चाहीये ,यदि रोगी एक साल से से ज्यादा समय से पीड़ित है तो हमारे धातु रोग आचार्य की सलाह अनुसार उपयोग कीजिये, प्राचीन आयुर्वेद की और से आचार्य जी से सलाह लेने की निःशुल्क सुविधा दी जाती है (संपर्क करें मोबाइल नंबर 8979923938पर)

Weight 0.25 kg
Dimensions 6 × 6 × 5 cm

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  1. Caitlyn

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