Desi mitti देसी मिट्टी Fece pack 250gm Aj Ayurveda desi mitti face pack
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Desi mitti देसी मिट्टी Fece pack 250gm Aj Ayurveda desi mitti face pack

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जॉइंट पेन
उम्र बढ़ने के साथ होने वाले जॉइंट पेन या जोड़ों के दर्द से भी Desi मिट्टी राहत दिलाती है। जब, जोड़ों में बहुत अधिक दर्द महसूस हो तो मुल्तानी मिट्टी को गर्म कर इससे सेंक दी जाती है। यह एक देसी नुस्खा है जिसे देहातों में आज भी इस्तेमाल किया जाता है।

इस्तेमाल का तरीका
एक कटोरी Desi मिट्टी लें। इसे तवे पर गर्म करें। फिर्, इसमें थोड़ा-सा पानी मिलाकर इसका एक गाढ़ा पेस्ट बनाएं। अब आंच से उतारकर इस मिट्टी को थोड़ा ठंडा होने दें।
फिर, किसी कपड़े में गर्म की गयी मिट्टी को पलटें और उसकी पोटली बनाएं।
अब, इस पोटली को दर्द वाली जगह पर रखें और धीरे-धीरे सिंकाई करें।

Desi मिट्टी में बादाम के कुछ टुकड़ों को कूटकर डाल दीजिए और उसी में कुछ मात्रा में दूध मिला लीजिए,इसे चेहरे पर लगाने से चेहरा कोमल भी बना रहेगा और साफ भी हो जाएगा।

पुदीने की कुछ पत्तियों को मिक्सर में पीस लीजिए, इसमें कुछ मात्रा में दही मिला लीजिए. इस पेस्ट को Desi मिट्टी में मिलाकर लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जायेंगे।
गुलाब जल को Desi मिट्टी में मिलाकर लगाने से चेहरे पर निखार आता है। पेस्ट को तब तक चेहरे पर लगा रहने दें जब तक वो सूख न जाए, इस पेस्ट को लगाने से चेहरा निखर जाएगा।

Desi मिट्टी को अंडा, शहद और ग्लिसरीन मिलाकर फेस पर लगाएं।ऑयली स्किन के लिए Desi मिट्टी को के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें गुलाबजल और चंदन पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं और करीब 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें, हफ्ते में एक या दो बार ऐसा जरूर करें।

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महंगे शैंपू अगर बाल और जेब दोनों पर भारी पड़ने लगे हैं, तो क्यों ना इस बार आप मिट्टी से बाल धोकर देखें?

शैंपू छोड़ मिट्टी से धोना शुरू करें अपने बाल, कुछ ही दिनों में दिखने लगेगा फर्क

मार्केट में ऐसे न जाने कितने प्रॉडक्ट्स की भरमार है, जो बालों से जुड़ी हर समस्या को दूर करने व उन्हें ज्यादा स्वस्थ बनाने का दावा करते हैं। लोग इन पर जमकर पैसे भी खर्च करते हैं। हालांकि, कई बार हाइ-फाइ प्रॉडक्ट्स की जगह साधारण से नुस्खे बालों के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। इसी तरह के नुस्खों में से एक मिट्टी से हेयर वॉश करना भी है, जिसे हमारे देश में न जाने कितनी पीढ़ियों से महिलाएं अपनाती आ रही हैं। यहां तक कि विदेश में भी बाल धोने का ये तरीका काफी पॉप्युलर हो चुका है।

हमारे देश में तो आज भी महिलाएं गांव की शुद्ध मिट्टी से बाल धोती हैं, लेकिन शहरों में बसे लोगों को ऐसी क्ले मिल पाना मुश्किल है। ऐसे में वे मार्केट से इसे खरीद सकते हैं। हेयरवॉश के लिए मुख्यतौर पर तीन तरह की क्ले रैजॉल/गैजॉल (Rhassoul/Ghassoul), बेंटोनाइट (Bentonite) और केओलिन (Kaolin) पॉप्युलर हैं। इन तीनों को हेयर मास्क के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।
केमिकल बेस्ड प्रॉडक्ट जहां स्कैल्प को क्लीन करने के साथ ही उसे डैमेज भी कर देते हैं, तो वहीं क्ले ये काम बिना किसी नुकसान के करती है। मिट्टी गंदगी और टॉक्सिन्स को खींच लेती है और पानी से जब इसे धोया जाता है तो बाल व स्कैल्प पूरी तरह से क्लीन हो जाते हैं। बालों में लगे तेल की चिकनाई तक इससे एक वॉश में दूर हो जाती है।

गीली मिट्टी के लाभकारी प्रयोग

महीन पिसी हुई मिट्टी को पानी के साथ घोलकर कीचड़ जैसा बना लें एवं उसको शरीर पर लेपकर सुखा लीजिए, कुछ देर बाद मिट्टी सूखने लगती है। फिर ठंडे या गुनगुने पानी से स्नान कर लेने से अनेक रोग दूर हो जाते हैं।

मिट्टी चिकित्सा के अन्य प्रयोग

रोग होने पर आवश्यकतानुसार निम्नलिखित प्रयोगों से उपचार किया जाता है। (1) मिट्टी की गरम पट्टी (2) मिट्टी की ठंडी पट्टी (3) गरम मिट्टी की पट्टी (4) रज स्नान (5) पंक स्नान (6) बालू भक्षण।

सूखी मिट्टी के लाभकारी प्रयोग
बिजली के मारे या सांप के काटे हुए व्यक्ति को यदि जमीन में करीब दो हाथ गहरा गड्ढा खोदकर उसमें बैठा दिया जाए और गीली मिट्टी से गर्दन और सिर खुला रखकर उसे भर दिया जाए तो 1 से 24 घंटे तक में रोगी के शरीर से जहर निकल जाएगा और वह मरने से बच जाएगा।
शुद्ध साफ मिट्टी को कपड़ा छानकर लीजिए और उसे पूरे अंग पर रगड़िए। पूरे शरीर पर रगड़ने के बाद 10 से 20 मिनट धूप में बैठ जाइए। तत्पश्चात शीतल जल से स्नान कर लें। यह सूखी मिट्टी का स्नान है

लाभ – त्वचा नरम, लचीली एवं कोमल हो जाती है। रोमकूप खुल जाते हैं। इससे शरीर के विजातीय तत्व पसीने के रूप में बाहर आने लगते हैं। त्वचा के छिद्र भरपूर श्वास लेने लायक हो जाते हैं जिससे त्वचा के अनेक रोग, चर्मरोग, दाद, खाज-खुजली, फोड़े-फुंसियां दूर होने लगती हैं। आयुर्विज्ञान में इसको ‘रज स्नान’ कहा गया है।

छान्दोग्य उपनिषद् में मिट्टी को अन्य पंच तत्वों जल, पावक, गगन तथा समीर का सार कहा गया है। स्वास्थ्य सौन्दर्य और दीर्घायु का मिट्टी से प्रगाढ़ सबंध होता है। मिट्टी में अनेक रोगों के निवारण की अद्भुत क्षमता होती है।

मिट्टी में अनेकों प्रकार के क्षार, विटामिन्स, खनिज, धातु, रासायन रत्न, रस आदि की उपस्थिति उसे औषधीय गुणों से परिपूर्ण बनाती है। औषधियां कहां से आती है? जबाब होगा पृथ्वी, मतलब सारे के सारे औषधियां के भंडार होता पृथ्वी। अत: जो तत्व औषधियों में है, उनके परमाणु पहले से ही मिट्टी में उपस्थित रहते हैं।

मिट्टी कई प्रकार की होती है तथा इसके गुण भी अलग-अलग होते हैं। उपयोगिता के दृष्टिकोण सें पहला स्थान काली मिट्टी का है, उसके बाद पीली, सफेद और उसके बाद लाल मिट्टी का स्थान है। मिट्टी के विभिन्न प्रकारों और उनकी उपयोगिता को ध्यान में रखकर मिट्टी का चयन करना चाहिए। इसके उपयोग के पहले कुछ बातें जरूर ध्यान में रखें…

* मिट्टी चाहे किसी भी रंग या प्रकार की हो, उसका प्रयोग करते समय यह सुनिश्चित कर लें कि वह साफ-सुथरी हो, उसमें कंकड़, पत्थर, तिनके आदि न हों।

* जहां से मिट्टी लें वह स्थान भी साफ सुथरा होना चाहिए किसी कूड़े के ढेर के पास से मिट्टी न लें। यदि किसी खेत से मिट्टी ली जाए तो एक या डेढ़ फीट जगह खोदकर ही लेनी चाहिए।

* तालाब या नदी के तट की मिट्टी बहुत लाभदायक होती है। दो पकार की मिट्टियों को मिलाकर भी प्रयोग किया जा सकता है। बालू मिश्रित मिट्टी बहुत उपयोगी होती है।

कारण बिगड़ गया है।

गोपी चन्दन

सफेद रंग की मिट्टी का लेप मस्तक पर लगाने से दिमाग की गरमी दूर होती है। सिर चकराने तथा सिर दर्द जैसी समस्याओं का निवारण भी इससे हो जाता है। मुंह में छाले होने की स्थिति में, पहले इस का लेप लगाना चाहिए तथा आधे घंटे बाद सादे पानी से कुल्ले कर लेने चाहिएं, छाले दूर हो जाएंगे।

मुल्तानी मिट्टी

गर्मियों में होने वाली घमौरियों के उपचार में मुल्तानी मिट्टी अचूक औषधि है। शरीर पर इसका पतला-पतला लेप खून की गर्मी को कम करता है। उबटन की तरह मुल्तानी मिट्टी का पयोग सुख और शरीर की कान्ति बढ़ाता है। तेज बुखार में तापमान तुरंत नीचे लाने के लिये सारे शरीर पर इसका मोटा-मोटा लेप करना चाहिए। सौंदर्य के लिए इसका विाेष प्रयोग होता है।

बालू

नदी या समुद किनारे की बालू शरीर की जलन, ताप तथा दाह को शांत करती है। सिर तथा मुंह को छोड़कर, सारे शरीर पर बालू चढ़ाकर घंटे भर पड़ा रहना, घबराहट, शारीरिक ताप, जलन और दाह को दूर करने का सबसे अच्छा उपाय है। आधी चिकनी मिट्टी और आधी बालू मिलाकर बनाए गए लेप की पट्टी बहुत लाभदायक होती है।

प्रयोग से पहले

Desi mitti जमीन से मिट्टी खोदकर लेते समय पहले मिट्टी को कुछ दिनों के लिए वहीं (खोदे गए स्थान) पर छोड़ देना चाहिए। जिससे खुली हवा, तेज धूप और चांदनी का सुप्रभाव मिट्टी ग्रहण कर सके, साथ ही वह सूख भी जाए।

Desi mitti प्रयोग से पूर्व मिट्टी को मोटे कपड़े से छानना जरूरी है जिससे कंकड़, पत्थर आदि निकल जाएं। मिट्टी को हमेशा ताजे ठंडे जल से घोलना चाहिए और उसे कपड़े में लीपकर पट्टी का इस्तेमाल करना चाहिए। बची हुई मिट्टी को किसी मटके में संभालकर रखना चाहिए।

Desi mitti लेप तैयार करने के लिए आवश्यकतानुसार मिट्टी को साफ जमीन पर रखना चाहिए। फिर किसी लकड़ी से हिलाते हुए थोड़ा-थोड़ा पानी डालना चाहिए। पट्टी तैयार करने के लिए मिट्टी गूंधे हुए आटे की तुलना में कुछ मुलायम होनी चाहिए। प्राय: लेप बनाते समय जल की मात्रा, मिट्टी की मात्रा की आधी होती है।

Desi mitti पट्टी तैयार करने के लिए आवश्यकतानुसार साफ कपड़ा लेकर उस पर मिट्टी फैलानी चाहिए। मिट्टी की परत की मोटाई लगभग आधा इंच अवश्य होनी चाहिए। तैयार होने पर पट्टी को सावधानीपूर्वक उठाकर प्रभावित अंग पर लगाना चाहिए।

सावधानियां

Desi mitti पट्टी लगाते हुए कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है जैसे यदि पट्टी पेडू या पेट पर बांधनी तो रोगी का खाली पेट होना बहुत जरूरी है। यदि रोगी भूखा न रह सकता हो तो पट्टी के प्रयोग के तीन घंटे पूर्व ही खा-पी लेना चाहिए।
गर्मियों में हर कोई चाहता है कि ठण्डा पानी पिये, कूल जगह जायेंगे, ठण्डी चीजे खाएं इस लिए गर्मियों में हम सभी फ्रूट खरबूजा, तरबूजा, खीरा, ककडी, पुदीन हारा, पन्हा जैसी ठंडी चीजो का उपयोग करते है और पानी भी फ्रिज का रखा हुआ पीते है मगर आप क्या यह जानते है कि फ्रिज में रखा हुआ पानी ठंडा तो होता है मगर यह आपकी प्यास नहीं भूजाता है साथ ही साथ आपकी सेहत के लिए भी नुकसान दायक है।

इसलिए चिकित्सकों की मानें तो मिट्टी के बने मटके का पानी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है। तेज गर्मी के चलते ऐसे में सूखे गले की प्यास बुझाने के जरूरी है कि आप मटके के पानी पिये।

मटके के पानी से होगे यह पांच फायदे

1 –Desi mitti गर्मी में मटके का पानी जितना ठंडा और सुकूनदायक लगता है, स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही फायदेमंद भी होता है। इसका तापमान सामान्य से थोड़ा ही कम होता है जो ठंडक तो देता ही है, पाचन की क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है।

2 – Desi mitti मटके का पानी पीना से कैंसर की बीमारी का खतरा बहुत कम हो जाता है। घड़े का पानी गले से संबंधी बीमारियों से बचा कर रखता है और यह हमको तरवाट के साथ जुकाम खांसी की परेशानी से भी बचाता है।

3- Desi mitti मटके का पानी पीना से पीएच संतुलन सही होता है। मिट्टी के क्षारीय तत्व और पानी के तत्व मिलकर उचित पीएच बेलेंस बनाते हैं जो शरीर को किसी भी तरह की हानि से बचाते हैं और संतुलन बिगडने नहीं देते।

4- Desi mitti मटके का पानी प्राकृतिक तौर पर ठंडा होता है, जबकि फ्रिज का पानी इलेक्ट्रिसिटी की मदद से। बल्कि एक बड़ा फायदा यह भी है कि इसमें बिजली की बचत भी होती है, और मटके बनाने वालों को भी लाभ होगा।

5- Desi mittiअगर आप दमा के रोगी हैं, तो भी मटके का पानी पिएं। लकवा पेशेंट्स को भी मटके का पानी नियमित तरीके से गर्मी में पीना चाहिए। इससे उनको फायदा मिलेगा।

पेट दर्द होने पर Desi मिट्टी की पट्टी पेट पर लगायी जाती है। इसके लिए एक कटोरी मिट्टी को पानी में रातभर के लिए या 4-5 घंटों के लिए भिगोकर रख दें। अब इस मिट्टी से पेट पर लेप करें और एक गीले कपड़े से पेट पर पट्टी बांधें। 30-45 मिनट तक इस पट्टी को बंधा रहने दें।

जॉइंट पेन
उम्र बढ़ने के साथ होने वाले जॉइंट पेन या जोड़ों के दर्द से भी Desi मिट्टी राहत दिलाती है। जब, जोड़ों में बहुत अधिक दर्द महसूस हो तो मुल्तानी मिट्टी को गर्म कर इससे सेंक दी जाती है। यह एक देसी नुस्खा है जिसे देहातों में आज भी इस्तेमाल किया जाता है।

इस्तेमाल का तरीका
एक कटोरी Desi मिट्टी लें। इसे तवे पर गर्म करें। फिर्, इसमें थोड़ा-सा पानी मिलाकर इसका एक गाढ़ा पेस्ट बनाएं। अब आंच से उतारकर इस मिट्टी को थोड़ा ठंडा होने दें।
फिर, किसी कपड़े में गर्म की गयी मिट्टी को पलटें और उसकी पोटली बनाएं।
अब, इस पोटली को दर्द वाली जगह पर रखें और धीरे-धीरे सिंकाई करें।

Desi मिट्टी में बादाम के कुछ टुकड़ों को कूटकर डाल दीजिए और उसी में कुछ मात्रा में दूध मिला लीजिए,इसे चेहरे पर लगाने से चेहरा कोमल भी बना रहेगा और साफ भी हो जाएगा।

पुदीने की कुछ पत्तियों को मिक्सर में पीस लीजिए, इसमें कुछ मात्रा में दही मिला लीजिए. इस पेस्ट को Desi मिट्टी में मिलाकर लगाने से चेहरे के दाग-धब्बे दूर हो जायेंगे।
गुलाब जल को Desi मिट्टी में मिलाकर लगाने से चेहरे पर निखार आता है। पेस्ट को तब तक चेहरे पर लगा रहने दें जब तक वो सूख न जाए, इस पेस्ट को लगाने से चेहरा निखर जाएगा।

Desi मिट्टी को अंडा, शहद और ग्लिसरीन मिलाकर फेस पर लगाएं।ऑयली स्किन के लिए Desi मिट्टी को के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें गुलाबजल और चंदन पाउडर मिलाकर चेहरे पर लगाएं और करीब 15 मिनट बाद गुनगुने पानी से चेहरा धो लें, हफ्ते में एक या दो बार ऐसा जरूर करें।

Weight 0.25 kg
Dimensions 6 × 6 × 5 cm

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